ফাতওয়া  নং  ০৫

ফজরের সময় গোসল কি জুমআর জন্য যথেষ্ট হবে?

ফজরের সময় গোসল কি জুমআর জন্য যথেষ্ট হবে?

ফজরের সময় গোসল কি জুমআর জন্য যথেষ্ট হবে?

প্রশ্ন:

 

মাননীয় মুফতী সাহেব। আমার জানার বিষয় হলো-

(ক) জুমআর দিনে গোসল করার বিধান কী?

(খ) যদি কেউ ফজরের সময় জুমআর নিয়তে গোসল করে নেয়, কিংবা স্ত্রী সহবাস বা স্বপ্নদোষের কারণে গোসল করে, সাথে জুমআরও নিয়ত করে নেয়- তাহলে এ গোসলই কি যথেষ্ট হবে এবং জুমআর গোসলের সওয়াব লাভ হবে? নাকি নতুন করে গোসল করতে হবে?

 

উত্তর:

الجواب باسم ملهم الصواب

(ক) জুমআর দিনে গোসল করা সুন্নত।

(খ) কেউ যদি শুক্রবার ফজরের সময় জুমআর নিয়তে গোসল করে এবং তা ফরজ গোসলের সঙ্গেও হয়, তবে তাতেও জুমআর সুন্নত গোসল আদায় হয়ে যাবে।

المراجع و المصادر

اخرج الترمذي في سننه، رقم: 492 – بسندهعَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: مَنْ أَتَى الجُمُعَةَ فَلْيَغْتَسِلْ.

وقال: وَفِي البَابِ عَنْ عُمَرَ، وَأَبِي سَعِيدٍ، وَجَابِرٍ، وَالبَرَاءِ، وَعَائِشَةَ، وَأَبِي الدَّرْدَاءِ.حَدِيثُ ابْنِ عُمَرَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ.

فى الدر المختارعلى صدر رد المحتار(1\168-169، ط. سعيد): (وسن لصلاة جمعة و) لصلاة (عيد) هو الصحيح كما في غرر الأذكار وغيره … ويكفي غسل واحد لعيد وجمعة اجتمعا مع جنابة كما لفرضي جنابة وحيض. اهـ

قال ابن عابدين رحمه الله تعالى في الشرح: (قوله: وسن إلخ) هو من سنن الزوائد، فلا عتاب بتركه كما في القهستاني. وذهب بعض مشايخنا إلى أن هذه الاغتسالات الأربعة مستحبة أخذا من قول محمد في الأصل: إن غسل الجمعة حسن، وذكر في شرح المنية أنه الأصح وقواه في الفتح، لكن استظهر تلميذه ابن أمير حاج في الحلية استنانه للجمعة لنقل المواظبة عليه، وبسط ذلك مع بيان دلائل عدم الوجوب… (قوله: هو الصحيح) أي كونه للصلاة هو الصحيح، وهو ظاهر الرواية. ابن كمال: وهو قول أبي يوسف. وقال الحسن بن زياد: إنه لليوم، ونسب إلى محمد والخلاف المذكور جار في غسل العيد أيضا كما في القهستاني عن التحفة، وأثر الخلاف فيمن لا جمعة عليه لو اغتسل وفيمن أحدث بعد الغسل وصلى بالوضوء نال الفضل عند الحسن لا عند الثاني. قال في الكافي: وكذا فيمن اغتسل قبل الفجر وصلى به ينال عند الثاني لا عند الحسن؛ لأنه اشتراط إيقاعه فيه إظهارا لشرفه ومزيد اختصاصه عن غيره كما في النهر، قيل وفيمن اغتسل قبل الغروب. واستظهر في البحر ما ذكره الشارح عن الخانية من أنه لا يعتبر إجماعا؛ لأن سبب مشروعيته دفع حصول الأذى من الرائحة عند الاجتماع والحسن وإن قال هو لليوم، لكن بشرط تقدمه على الصلاة، ولا يضر تخلل الحدث بينه وبين الغسل عنده. وعند أبي يوسف يضر. اهـ. ولسيدي عبد الغني النابلسي هنا بحث نفيس ذكره في شرح هداية ابن العماد. حاصله أنهم صرحوا بأن هذه الاغتسالات الأربعة للنظافة لا للطهارة مع أنه لو تخلل الحدث تزداد النظافة بالوضوء ثانيا، ولئن كانت للطهارة أيضا فهي حاصلة بالوضوء ثانيا مع بقاء النظافة فالأولى عندي الإجزاء وإن تخلل الحدث؛ لأن مقتضى الأحاديث الواردة في ذلك طلب حصول النظافة فقط. اهـ. أقول: ويؤيده طلب التبكير للصلاة، وهو في الساعة الأولى أفضل وهي إلى طلوع الشمس، فربما يعسر مع ذلك بقاء الوضوء إلى وقت الصلاة ولا سيما في أطول الأيام، وإعادة الغسل أعسر – {وما جعل عليكم في الدين من حرج} [الحج: 78]- وربما أداه ذلك إلى أن يصلي حاقنا وهو حرام، ويؤيده أيضا ما في المعراج: لو اغتسل يوم الخميس أو ليلة الجمعة استن بالسنة لحصول المقصود وهو قطع الرائحة اهـ… (قوله: اجتمعا مع جنابة) أقول: وكما لو كان معهما كسوف واستسقاء، وهذا كله إذا نوى ذلك ليحصل له ثواب الكل تأمل. اهـ كلام ابن عابدين رحمه الله.

قال ابن نجيم رحمه الله فى البحر الرائق (1\116-117، ط.زكريا): ( قوله وسن للجمعة والعيدين والإحرام وعرفة ) أي وسن الغسل لأجل هذه الأشياء أما الجمعة فلما روى الترمذي وأبو داود والنسائي وأحمد في مسنده والبيهقي في سننه وابن أبي شيبة في مصنفه وابن عبد البر في الاستذكار عن قتادة عن الحسن عن سمرة قال { قال رسول الله : صلى الله عليه وسلم من توضأ يوم الجمعة فبها ونعمت ومن اغتسل فالغسل أفضل } قال الترمذي حديث حسن صحيح أي فبالسنة أخذ ونعمت هذه الخصلة …الخ وهذا مذهب جمهور العلماء وفقهاء الأمصار ، وهو المعروف من مذهب مالك وأصحابه وما وقع في الهداية من أنه واجب عند مالك فقال بعض الشارحين : إنه غير صحيح ، فإنه لم يقل أحد بالوجوب إلا أهل الظاهر وتمسكوا بما رواه البخاري ومسلم من حديث عمر قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم { من جاء منكم الجمعة فليغتسل } والأمر للوجوب .وروى البخاري ومسلم من حديث الخدري أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال { غسل يوم الجمعة واجب على كل محتلم } وقد أجاب الجمهور عنه بثلاثة أجوبة؛ أحدها: أن الوجوب قد كان ونسخ ودفع بأن … ثانيها: أنه من قبيل انتهاءالحكم بانتهاء علته كما يفيده ما أخرجه أبو داود عن عكرمة أن ناسا من أهل العراق جاءوا فقالوا يا ابن عباس : أترى الغسل يوم الجمعة واجبا فقال : لا ولكنه طهور وخير لمن اغتسل ومن لم يغتسل فلا شيء عليه بواجب وسأخبركم كيف بدأ الغسل { كان الناس مجهودين يلبسون الصوف ويعملون على ظهورهم ، وكان مسجدهم ضيقا مقارب السقف إنما هو عريش فخرج رسول الله صلى الله عليه وسلم في يوم حار وعرق الناس في ذلك الصوف حتى ثارت منه رياح حتى أذى بعضهم بعضا فلما وجد عليه السلام تلك الرياح قال يا أيها الناس إذا كان هذا اليوم فاغتسلوا وليمس أحدكم أمثل ما يجد من دهنه وطيبه } قال ابن عباس: ثم جاء الله بالخير ولبسوا غير الصوف وكفوا العمل ووسع مسجدهم وذهب بعض الذي كان يؤذي بعضهم بعضا من العرق…الخ وذهب بعض مشايخنا إلى أن هذه الأغسال الأربعة مستحبة أخذا من قول محمد في الأصل: إن غسل الجمعة حسن. قال في فتح القدير : وهو النظر… ا هـ لكن قال تلميذه ابن أمير حاج: والذي يظهر استنان غسل الجمعة لما عن عائشة رضي الله عنها { أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان يغتسل من أربع من الجنابة ويوم الجمعة وغسل الميت ومن الحجامة } رواه أبو داود وصححه ابن خزيمة والحاكم وقال على شرط الشيخين وقال البيهقي : رواته كلهم ثقات مع ما تقدم ، فإن هذا الحديث ظاهره يفيد المواظبة وما تقدم يفيد جواز الترك من غير لوم ، وبهذا القدر تثبت السنة… اهـ كلام ابن نجيم رحمه الله فى البحر

وقالرحمه الله (1\119): سبب مشروعية هذا الغسل لأجل إزالةالأوساخ في بدن الإنسان اللازم منها حصول الأذى عند الاجتماع … وفي معراج الدراية لو اغتسل يوم الخميس أو ليلة الجمعة استن بالسنة لحصول المقصود ، وهو قطع الرائحة ا هـ .ولم ينقل خلافا. اهـ كلام ابن نجيم رحه الله

ويراجع أيضا: حاشية الطحطاوي على المراقي107، تبيين الحقائق1\71، مجمع الانهر 1/41.

فيفتاوی محمودیہ 8/177: اگر شب جمعہ اور شب عیدین میں غسل کرلیا جا‍‌ئے تب بھی کافی ہے کہ اصل مقصود قطع رائحہ حاصل ہے-

وفي احسن الفتاوي (4\141,زكريا ): سوال : جمعه کے دن غسل جنابت صبح كيا تو كيا غسل مسنون پھر دو باره كرنا هوگا يا يهي غسل كافي هو كر غسل مسنون كا بھي ثواب مل جاے گا- بينو ا توجروا

جواب: يهي كافي هے دوباره غسل كي ضرورت نهي بلكه صفائ كا مقصد جمعرات كي دن غسل كرنے سے حاصل هو جاےتو وه بھی كافي ہے–

فقط، والله تعالى أعلم بالصواب

আবু মুহাম্মাদ আব্দুল্লাহ আলমাহদী (হাফিযাহুল্লাহ)
২০-০২-২০১৮ ইং

কিতাব ও রিসালাহ

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  • বাংলাদেশের জিহাদ সমর্থক ভাইদের জন্য অনলাইন দাওয়াতের কিছু নির্দেশনাবাংলাদেশের জিহাদ সমর্থক ভাইদের জন্য অনলাইন দাওয়াতের কিছু নির্দেশনা

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    সাইটটির সঙ্গে যুক্ত আছেন, আলিম ও তালিবুল ইলমের সমন্বয়ে গঠিত, আহলুস সুন্নাহ ওয়াল জামায়াহ’র অনুসারী একটি তায়েফা, যাঁরা ইলমে দ্বীন অন্বেষণ ও দ্বীনি দাওয়াহ’র কাজে নিয়োজিত। এ সাইটে আমরা ঐ লেখাগুলোই প্রকাশ করি, যা উম্মাহর জন্য উপকারী এবং কুরআন সুন্নাহর মানদণ্ডে উত্তীর্ণ। যাঁদের লেখা এখানে প্রকাশিত হয়, তাঁদের ভিন্ন কোনো লেখার দায়ভার আমাদের উপর বর্তাবে না। আমরা সর্বদা চেষ্টা করি, কুরআন সুন্নাহর সঠিক দলীলের উপর ভিত্তি করে লেখার। তবে নিজেদের অজান্তে কোনো ভুল হয়ে গেলে তা শুধরে নিতে আমরা সদা প্রস্তুত। তাই গঠনমূলক ও দলীলভিত্তিক যে কোনো সমালোচনা ও পর্যালোচনাকে আমরা স্বাগত জানাই।
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